बात पते की....

भारत के संविधान भाग-3 की धारा 25 से 30 यदि भारत की असुरक्षा का कारण बन जाए तो हमें इसे पुनः परिभाषित करने की जरूरत है।- शम्भु चौधरी

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Shambhu Choudhary


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भारत का संविधान और अल्पसंख्यक

Posted On: 14 Apr, 2015  
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आतंकवादी पत्रकारिता ? -लेखक: शम्भु चौधरी

Posted On: 1 Apr, 2015  
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डॉ. गौरीशंकर राजहंस का लेख?

Posted On: 20 Mar, 2014  
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‘आप’ फूंक-फूंक कर चले।

Posted On: 6 Mar, 2014  
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अण्णाजी की राजनीति?

Posted On: 4 Mar, 2014  
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भाजपा अध्यक्ष श्री राजनाथ जी,

Posted On: 26 Feb, 2014  
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“संसद” बहुमत की बपौती नहीं!

Posted On: 22 Feb, 2014  
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भाजपा पागला गई क्या?

Posted On: 19 Feb, 2014  
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भाजपा का पोल-खोल?

Posted On: 18 Feb, 2014  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आप बिलकुल सही कह रहे हैं आदरणीय चौधरी जी! अभी राजनीति का संक्रमण काल चल रहा है रोज उठापटक चल रही है. जिसको जहाँ दाल गलती दीख रही है वहीं अपनी मुंडी घुसा दे रहा है, use से सम्बंधित मेरे आलेख का कुछ अंश नीचे दे रहा हूँ. आप के समर्थक अभी भी कम नहीं हैं अतिउत्साह में मामला ख़राब हो सकता है. अब केजरीवाल को कौन समझाए… चले हैं राजनीति के कीचड को साफ करने…. यानी कमल के जड़ पर ही प्रहार! गलत बात ! 3M के पीछे लगे हुए हैं, मोदी, मुकेश (अम्बानी) और साथ में मीडिया भी … राजनीति में आए हैं, तो राजनीति करिये… जैसा सभी दल कर रहे हैं, नहीं तो तीसरा मोर्चा में मिल जाइये …हो सकता है वहाँ बहुत सारे प्रधान मंत्री के दावेदारों में आप सर्वसम्मत्ति से चुन लिए जाएँ, जैसे देवेगौड़ा को चुना गया था. आप अदना सा ‘आम आदमी’ बड़े बड़े पर्वतों से टकरायेंगे? नरेंद्र मोदी, राहुल को आपने साम्प्रदायिक और भ्रष्टाचारी बता दिया, ऊपर से मुकेश अम्बानी, अदानी आदि को घसीटने की क्या जरूरत थी? जिस मीडिया ने आपको इतना महत्व दिया, उससे भी दुश्मनी मोल ले ली. दिल्ली में आपको मौका मिला था वहां से भी दुम दबाकर भागे … सभी आपको भगोड़ा बता रहे हैं, पागल या येड़ा बतला रहे हैं. अब आपका रोड शो कितना रंग लाता है, वह तो जनता का मत ही बतलायेगा. राहुल जी भी तो रोड शो कर रहे हैं, पर मोदी का जलवा तो देखिये कि सभी लोग उनकी आकर्षण शक्ति से खिंचे चले आ रहे हैं. कभी लता मंगेशकर तो कभी राखी सावंत, मल्लिका शेरावत तो कभी मेघना पटेल भी. गजब का भाषण देते हैं श्री मोदी जी, उनके आगे पीछे सचमुच कोई नहीं दीखता कोई नेता भी नहीं बुजुर्ग लोग अब सन्यास ही ले लें तो अच्छा है, नौजवानों में नयी जोश फूंकने वाले, महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने वाले, दलितों और महादलितों का यह पिछड़ा नेता जरूर ही देश को पिछड़ेपन से बाहर ले जायेगा ..किसी को कोई संदेह है तो एक बार हेलिकॉप्टर से उनकी सभाओं में जूट भीड़ को देख ले …होश उड़ जायेंगे.पसीने छूटने लगेंगे.अनायाश ही उसके मुंह से भी निकल पड़ेगा मोदी जी की जय. क्योंकि अब यह पार्टी सिर्फ अगड़ों और बनियों की नहीं है पूरा भारत इसके अंदर है एक मात्र राष्ट्रवादी पार्टी. बाकी तो सभी भेड़चाल वाली है इन सबसे मुक्ति पानी ही होगी..गुजरात की मिट्टी,, गुजरात का पानी,गुजरात की बिजली, गुजरात का उद्योग, गुजरात की उपज, गुजरात की खुशबू पूरे देश में लानी ही होगी. सरदार वल्लभ भाई पटेल भी तो गुजराती ही थे, महात्मा गांधी,गुजराती ही थे,और भी कई महात्मा और उद्योगपति गुजरात से ही हैं. धन्य है हमारा गुजरात जिसने इतने सारे महान लोगों को पैदा किया! …सिर्फ साठ महीने दीजिये इस चायवाले को ..देखिये कैसे कायाकल्प करता है इस देश का. अरे रे, अश्विनी चौबे जी, गिरिराज बाबू, डॉ.सी पी ठाकुर साहब, आपलोग नाराज मत होइए आप तो हमेशा से अपने थे, हैं और रहेंगे, घर आए मेहमान रामविलास जी का स्वागत तो कर लेने दीजिये….

के द्वारा: jlsingh jlsingh

संसद सिर्फ बहुमत की बपौती नहीं है। इससे 125 करोड़ लोगों की आस्था जूड़ी हुई है। बहुमत एक आस्था और व्यवस्था का नाम है, ना कि तानाशाही का। राजनैतिक दलों में आपसी सहमती बने यह अच्छी परंपरा है। परन्तु संसद को ब्लैकआउट कर तेलंगाना बिल पारित कर देना। देश को गुमराह कर ‘‘लोकपाल बिल’’ को पास करवाना, अपने राजनैतिक फायदे के लिये ‘‘दागी बिल’’ पर आपसी सहमती बनाना। इसीप्रकार जो लोग देश के हिसाब-किताब की पल-पल की खबर रखना चाहतें हैं वे ही लोग अपना हिसाब देना नहीं चाहते? ऐसे कृत्य को बहुमत की मोहर लगा देना, लोकतंत्र के लिये घातक माना जाना चाहिये। ऐसा बहुमत जो लोकतंत्र की मूल भावना को तहसनहस करता हो, ऐसा बहुमत जो देश को लूटने के लिये बनाया जाता हो और लुटरों को सुरक्षा प्रदान करता हो उसे कदापी बहुमत नहीं माना जा सकता भले ही पूरी की पूरी संसद उसके पक्ष में ही क्यों ना खड़ी हो। हमें इसके उन पहलुओं पर भी गंभीरता से सोचना होगा कि ‘अल्पमत’ की जायज बातों को कहीं ‘बहुमत’ से दबाया तो नहीं जा रहा? यदि ऐसा है तो यह लोकतंत्र के लिये शुभ संकेत नहीं है। बहुत ही सार्थक और सटीक बात कही है आपने श्री शम्भू जी ! www. yogi-saraswat.blogspot.com

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

आप लोग क्या चाहते हो .......? लोकसभा-विधानसभा में विरोध न हो जो सरकार चाहे करती रहे ....? आज कल विदेशी पैसे से पल रहे कुछ नौटंकी छाप लोग देश को बर्बाद करने में लगे हुए हैं अपने झूठ और चोरी कि बात नहीं करते और अपने अलावा सभी को चोर कहते हैं ! जब साला एक मुख्यमंत्री खुद सडकों पर धरना करता है और पत्थऱ चलवाता है तो कहता है ये गणतंत्र है और लोकसभा, विधानसभा क्या है .....? लोकतंत्र या गणतंत्र का हिस्सा नहीं है ...? विधानसभा चलनी चाहिए और रोड बंद कर देनी चाहिए ....? धरना देना है इसीलिये ......? मूर्ख होना पाप नहीं है मूर्ख बनाना पाप है कोंग्रेश का समर्थन ले कर जिन लोगो ने सरकार चलाई वो कहते हैं बीजेपी कोंग्रेश मिल काम करती है .....? जो लोग रिलाइंस से चन्दा मांगते हैं और करप्सन का केस भी करते हैं और दलाल दूसरों को कहते हैं .....? एक और बात कहना चाहता हूँ कम से कम आम आदमी पार्टी वाले जरुर चोर हैं बाकी का मैं कुछ नहीं कह सकता इस पार्टी का नाम सुन सुन के और कारनामे देखने के बाद मुझे कोंग्रेश अच्छी लगने लगी और यही काम है आप वालों का कोंग्रेश कि इज्जत बढ़ाओ !

के द्वारा: dhirchauhan72 dhirchauhan72

हमें हर बात में व्यवस्था की दुहाई देते नहीं थकते ये लोग, संविधान की रक्षा के लिये दिल्ली विधानसभा में तलवार लेकर खड़े हो गए थे। दूसरी तरफ कल जो लोकसभा में इनलोगों ने किया वह क्या था? विश्व भर के तमाम समाचार पत्र भारतीय लोकतंत्र की निंदा करते नहीं थक रहे। देश की कई राजनैतिक पार्टियाँ ने भी इस बहुमत पर सवाल उठाया है। किसी ने लिखा ‘‘लोकतंत्र की हत्या’’ किसी ने कहा लोकतंत्र पर बुल्डोज़र चला दिया। इसी को बहुमत कहते हैं क्या? सवाल यहाँ भी है कि केवल इतना भर ‘‘लोकतंत्र की हत्या’’ किसी ने कहा लोकतंत्र पर बुल्डोज़र चला दिया। कहने भर से हमारे कर्त्तव्यों की इतिश्री हो जाती है क्या? तमाम मीडिया और बुद्धिजीवी वर्ग सम्मानित वयोवृद्ध नेता क्या कर रहे हैं? क्या एक बड़े आंदोलन की चेतावनी नहीं है यह सब? सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

थोथा चणा बाजे घणा ......................................... थोथा चणा बाजे घणा, यही कहावत सिद्ध कर रहे है करके धरने और हंगामा ,........... अब तो केजरीवाल ऑस्कर अवार्ड के दावेदार बन गए है करके मनोरंजक ड्रामा ! ......................................... जैसे नयी बहु आते ही ससुराल वालो को चोर डाकू बताये ऐसी है इनकी करतूत ,........... दहेज़ विरोधी कानून में सबको फ़साने की बात करे जब पति ने मांगे सबूत ! ......................................... हर बात पे जनमत करवाने वाले भागने से पहले क्यों नहीं किया जनता से परामर्श , ........... सरकार चलाना इनके बस की बात नहीं त्यागपत्र से तो यही निकलता है निष्कर्ष ! ......................................... सरेआम आत्महत्या की है और इनका हो रहा है शहादत का रंग देने का प्रयास ,........... जनता आपकी नौटंकी से बहुत तंग आ चुकी है और चाहिए शांति और विकास ! ......................................... दरअसल नजर लोकसभा चुनाव पर है और राजनीती का खेल थी दिल्ली के जमीं ,........... इसबार समझदारी से वोट देना वर्ना दिल्ली में भी नहीं थी पढ़े लिखो की कमीं ! ......................................... अवधेश राणा

के द्वारा: avdhesh avdhesh

मुझे इस कालकोठरी से आजाद कराओ’’ जलते हुए दीये से एक सबक लेना ही होगा, अंधेरे को मिटाने के लिये- किसी को तो जलना ही होगा। मित्रों ! मुझे कल रातभर इस बात की बैचेनी रही कि इन भ्रष्ट नेताओं से कैसे लड़ा जायेगा? चारों तरफ से हमले होने लगे। गरीब देश के 340 कमरे के आलिशान भवन में कैद भारत का संविधान तड़प-तड़प के पुकारता रहा ‘‘मुझे इस कालकोठरी से आजाद कराओ’’ । कोई इसके अंदर प्रवेश ना कर जाय। रातों-रात चारों तरफ से पहरेदारों की चौकसी बढ़ा दी गई। संविधान विशेषज्ञों की एक फौज बनी हुई है जो देश को लूटने वाले राजनेताओं के अंगरक्षक/संरक्षक बने हुए हैं। हमें इस महल की दीवारों को तौड़कर संविधान को आजाद कराना होगा। आईये ! हम सब प्रण लें कि इस लड़ाई में केजीरवाल को तन-मन-धन से साथ देगें। यह आजादी की दूसरी लड़ाई है। जयहिन्द! - शम्भु चौधरी 15.02.2014 Please Read More Article Baat Pate Ki #ArvindKejriwal

के द्वारा: Shambhu Choudhary Shambhu Choudhary

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

के द्वारा: Shambhu Choudhary Shambhu Choudhary

के द्वारा: jlsingh jlsingh

शम्भुनाथ चौधरी जी सार्थक , दिल को छू लेने वाला सटीक और बेबाक लेख -बधाई हो जाके पाँव न फटी बिवाई सो क्या जाने पीर परायी -इसी विषय पर लिखी मेरी रचना आप की रचना के नीचे लगी है ---छद्म युद्ध है- नहीं सामने योद्द्धा ना – कोई शर्तें ! शुक्ल भ्रमर ५ आखिर खून किसका बहा…? जिसका बहा वे रोये न तो इन्हें देश की चिन्ता है न किसी के दुःख-दर्द की बस इन सियासतदानों की सत्ता चलती रहे। ‘‘जब माझी नाव डुबोऐ तो फिर उसे कौन बचाए’’ अक्षरधाम, संसद, जयपुर, वाराणसी घाट, समझौता एक्सप्रेस, इन सब की बारी भले ही एक बार आई हो पर मुम्बई का नाम गलती से बदल दिया गया इसका नाम पुनः बम..बम..बम्बई..माफ कीजिए…मुम्बई! बम्बई रख लेना चाहिये।

के द्वारा: surendra shukla bhramar5 surendra shukla bhramar5




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